एकादशी व्रत के नियम

By | June 11, 2019

हमारे हिन्दू धरम में एकादशी  अत्यंत महत्वपूर्ण मानी गयी है । इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है, और उनका व्रत किया जाता है, कहा जाता है, एकादशी का व्रत कई पापो को नष्ट करता है । इस एकादशी व्रत को करने के कई नियम है जो इस प्रकार है :

1.  एकादशी व्रत के नियम दशमी की रात से ही आरम्भ हो जाते है , दशमी की रात को  मांस, लहसुन, प्याज, मसूर की दाल आदि निषेध वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए।  रात्रि को पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए तथा भोग-विलास से दूर रहना चाहिए।

2. एकादशी के दिन प्रात: लकड़ी का दातुन न करें, नींबू, जामुन या आम के पत्ते लेकर चबा लें और अंगुली से कंठ साफ कर लें, वृक्ष से पत्ता तोड़ना भी ‍वर्जित है। अत: स्वयं गिरा हुआ पत्ता लेकर सेवन करें।

3. एकादशी के दिन सुबह नहा धो कर, भगवान विष्णु का पंचामृत से अभिषेक करे , उनकी पूजा करे, तथा एकदशी व्रत का संकल्प ले । व्रत से पूर्व संकल्प लेना अति आवश्यक है ।

4. उसके पश्चात एकदशी व्रत की कथा सुने, एकादशी व्रत कथा के श्रवण मात्र से ही वाजपेयी यज्ञ का फल प्राप्त होता है, उसके पश्चात श्री हरि की आरती करे ।

5. फिर प्रभु के सामने इस प्रकार प्रण करना चाहिए कि ‘आज मैं चोर, पाखंडी़ और दुराचारी मनुष्यों से बात नहीं करूंगा और न ही किसी का दिल दुखाऊंगा। 

6.  इस दिन रात्रि जागरण करे , रात्रि में भगवान विष्णु के भजन कीर्तन करे, इस दिन रात्रि जागरण करने वाले के पुण्यो की गणना तो ब्रह्मा जी भी करने में असमर्थ है ।

7. एकादशी के दिन घर में झाड़ू नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि चींटी आदि सूक्ष्म जीवों की मृत्यु का भय रहता है। इस दिन बाल नहीं कटवाना चाहिए। न नही अधिक बोलना चाहिए। अधिक बोलने से मुख से न बोलने वाले शब्द भी निकल जाते हैं।

8. इस दिन यथा‍शक्ति दान करना चाहिए। किंतु स्वयं किसी का दिया हुआ अन्न आदि कदापि ग्रहण न करें। 

9. इस दिन व्रतधारी व्यक्ति को गाजर, शलजम, गोभी, पालक, इत्यादि का सेवन नहीं करना चाहिए।  केला, आम, अंगूर, बादाम, पिस्ता इत्यादि अमृत फलों का सेवन करें।

10. इस दिन ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ इस द्वादश मंत्र का यथा संभव जाप करें।

11. द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को मिष्ठान्न, दक्षिणा देना चाहिए। तथा उसके पश्चात ही व्रत खोलना चाहिए ।

इस व्रत को करने वाला दिव्य फल प्राप्त करता है और उसके जीवन के सारे कष्‍ट समाप्त हो जाते हैं।

जय श्री हरि 

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