गुरु पूर्णिमा / गुरु पूर्णिमा के ज्योतिष उपाय

By | July 14, 2019

गुरु पूर्णिमा | गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः । गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः ॥ अथार्त गुरु ही ब्रह्मा है, गुरु ही विष्णु है, गुरु ही देवो के देव भगवान् शंकर है; गुरु ही साक्षात् परब्रह्म है;

उन सद्गुरु को नमस्कार है I हमारे शास्त्रों में गुरु को बहुत ही उच्च स्थान दिया गया है , ऎसी मान्यता है की जिस प्रकार सूर्य के ताप से तपभूमि को बर्फ सी शीतलता एवं फसल पैदा करने की शक्ति प्राप्त होती है,

उसी प्रकार गुरु के चरणों में मदमस्तक हुए साधको को त्याग , शांति और भक्ति मार्ग की प्राप्ति होती है I

गुरु पूर्णिमा
गुरु पूर्णिमा

वैसे तो प्रत्येक शिष्य को अपने गुरु का आदर सत्कार सदा ही करना चाहिए, परन्तु गुरु पूर्णिमा के दिन विशेष रूप से अपने गुरु की वंदना कर मनुष्य अपने जीवन में मान सम्मान और सफलता को प्राप्त कर सकता है I

इसी दिन श्री वेद व्यास जी का जन्म भी हुआ था, श्री वेद व्यास जी संस्कृत के बहुत बड़े विद्वान और चारो वेदो के रचयिता थे, इसी कारण उन्हें सम्मान देने के लिए इस दिन को “व्यास पूर्णिमा ” भी कहा जाता है I

इस वर्ष गुरु पूर्णिमा 16 जुलाई 2019 को पड़ रही है I गुरु पूर्णिमा के दिन किये जाने वाले कुछ उपाय इस प्रकार से है :

गुरु पूर्णिमा के ज्योतिष उपाय

सुबह जल्दी उठ कर स्नान इत्यादि करे तथा क्योंकि यह दिन ऋषि वेद व्यास जी का जन्म दिवस है तो इस दिन मन ही मन व्यास जी का ध्यान करे और उनके द्वारा रचित ग्रंथो की पूजा करे I

यथा संभव अपने गुरु से मिलने जाये और उनके चरण स्पर्श कर उनसे आशीर्वाद ले तथा गुरु दक्षिणा के रुप में उन्हें कोई उपहार दे ,आज के दिन गुरु का सम्मान करने से भविष्य सवंर जाता है I

हमारे प्रथम गुरु हमारे माता पिता है , इसलिए उनके चरण स्पर्श कर उनसे आशीर्वाद ले, उन्हें उपहार दे तथा उनका हृदय कभी ना दुखायें I

भगवान् विष्णु इस जगत के पालनहार और समस्त ब्रह्माण्ड के गुरु है इसलिए इस दिन भगवान् विष्णु का पूजन अवशय करना चाहिए तथा उनसे जीवन में कृपा बनाये रखने की प्राथना करे, उनके चित्र के समक्ष गाय के घी का दीपक जलाये , ऐसा करने से आपके बिगड़े हुए काम बनने लगेंगे I

जिन जातको का गुरु कमजोर है, वो इसी दिन से प्रतिदिन अपने माथे पर केसर का तिलक लगाए, पीली वस्तुओं का दान करे तथा केले के वृक्ष पर जल चढ़ाये I

भोजन में केसर का प्रयोग करे और स्नान के पश्चात अपनी नाभि तथा माथे पर केसर का तिलक लगाए I

गुरु पूर्णिमा के दिन स्नान के जल में नागरमोथा नमक वनस्पति डालकर स्नान करे I

यदि आपके व्यापार में नुक्सान हो रहा है तो गुरु पूर्णिमा के दिन किसी गरीब को पीले वस्त्र, पीली मिठाई और पीले फल दान करे I

गुरु पूर्णिमा के दिन ब्रहस्पति के मन्त्र ” ॐ ब्रह्म बृहस्पतेय नमः ” का जप करे अथवा गायत्री मन्त्र का अधिक से अधिक जाप करे ऐसा करने से गुरु के अशुभ भाव में कमी आती है और शीघ्र ही भाग्य उदय होता है I

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गुरु पूर्णिमा ग्रहण का समय और सूतक काल 

शास्‍त्रों के नियम के अनुसार चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण से नौ घंटे पहले ही शुरू हो जाता है. तो इस हिसाब से सूतक 16 जुलाई को शाम 4 बजकर 31 मिनट से ही शुरू हो जाएगा.

ऐसे में सूतक काल शुरू होने से पहले गुरु पूर्णिमा की पूजा विधिवत् कर लें. सूतक काल के दौरान पूजा नहीं की जाती है. सूतक काल लगते ही मंदिरों के कपाट भी बंद हो जाएंगे. 

ग्रहण काल आरंभ: 16 जुलाई की रात 1 बजकर 31 मिनट 
ग्रहण काल का मध्‍य: 17 जुलाई की सुबह 3 बजकर 1 मिनट 
ग्रहण का मोक्ष यानी कि समापन: 17 जुलाई की सुबह 4 बजकर 30 मिनट  

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