अपनी बेटी को अच्छे संस्कार दे (Ache sanskar)

Ache sanskar -बेटी शब्द सुनते ही कानों में मधुर रस घुल जाता है और आँखों के सामने आ जाती है – अपनी प्यारी दुलारी, बिटिया की मनमोहक छवि, जो अपनी प्यारी हंसी से आपका मन मोह लेती है , जो आपके आंगन में एक कोयल की तरह कूकती रहती है , जो बचपन में आप ही के आंगन में गुड्डे गुड़िया का खेल खेलकर बड़ी होती है , जो कभी आप ही की साड़ी पहन कर खेल खेल में एक माँ बनती है।

यही प्यारी बेटी पल पल आपके आंगन में खिलखिलाते हुए बड़ी होती है और एक दिन आप सबको अकेला छोड़ कर डोली में बैठ कर अपनी ससुराल चली जाती है। यही इस दुनिया की रीत है , यही इस दुनिया का रिवाज है, जो हर किसी को निभाना पड़ता है। आपकी नन्ही परी , नन्ही कली, एक दिन किसी और की पत्नी, किसी और के घर की बहु बन जाती है। और उस घर जाकर उसे निभाना पड़ता है – एक बहु का फर्ज, एक पत्नी का फर्ज, एक भाभी का फर्ज ! (Ache sanskar)

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क्या आपने अपनी नन्ही परी को उसके आने वाले भविष्य के बारे में , उसकी आने वाली ससुराल के विषय में उससे बात की है। याद रखिये, जब आपकी नन्ही बेटी किसी और के घर की बहु बनती है तो उसके हाथों में आ जाती है – उस घर की जिम्मेदारी तथा दो दो घरों की मर्यादा।

कहते है की बच्चों की प्रथम पाठशाला उसका अपना घर होता है , उसके प्रथम गुर उसके माता पिता होते है। बच्चों पर अपने माता पिता के संस्कारों का कुछ ना कुछ प्रभाव तो अवश्य ही पड़ता है। यदि माँ संस्कारी है, गुणवान है , तो यह बात 100 % सच है की उसके कुछ गुण तो बेटी में अवश्य ही आते है। इसलिए माता पिता का फर्ज है की अपनी बेटी को बचपन से ही अच्छे संस्कार दे , जैसे :

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Ache Sanskar (अच्छे संस्कार)

  • घर में तथा घर के बाहर सभी बड़ों को हाथ जोड़ कर नमस्ते करना।
  • बड़ों के साथ सम्मान से बात करे।
  • किसी से भी असभ्य शब्द या गाली गलौच ना बोले।
  • ज्यादा देर तक ना सोये।
  • घर में सभी बड़ों के सामने ऐसे वस्त्र पहने जिसमे वह मर्यादा शील लगे।
  • घर के छोटे मोठे कार्यों माँ की मदद करे।
  • घर की सफाई का ध्यान रखे।
  • सुबह नहा धो कर पूजा पाठ करे।
  • अपने पति का सम्मान करे तथा उससे आदर से बात करे।
  • अपने सास ससुर को अपने माता पिता के समान समझ उनकी इज्जत करे।
  • अपनी ससुराल के रीति रिवाजों को अपनाए।
  • अपनी ससुराल में अपने माता पिता के दिए हुए उपहारों और दूसरी सुख सुविधाओं की चीजों पर या अपने माता पिता की दौलत पर घमंड ना करे। क्योंकि घमंड का सर हमेशा नीचे होता है।
  • बेटी विवाहोपरान्त कहीं आने जाने के लिए माता-पिता और पति से अवश्य पूछे। बिना अनुमति लिए कहीं न आएं जाए।
  • अपनी ससुराल की बुराई अथवा अपने पति की बुराई अपने मायके में ना करें। ऐसे में पति की इज्जत मायके में कम होती है।
  • बेटी मायके और ससुराल दोनों के बीच एक पुल का काम करती है। इसलिए वह यह ध्यान रखे की इस पुल में दरार ना आने पाए। उसकी गलती से दोनों परिवार के सदस्यों के रिश्तो में बड़ी दरारें और कडवडाहट आ जाती है।
  • पति पत्नी के बीच झगड़ा होने पर अपने मायके ना जाये। यदि आपकी बेटी झगड़ा करके अपने मायके आने लगती है तो उसे अपने घर आने के लिए मना कर दीजिये। उसे समझाए जैसे बचपन में उसके भाई बहनो से झगड़ा होता था और थोड़ी देर के बाद सभी भाई बहन फिर से एक हो जाते थे, उसी प्रकार पति पत्नी का झगड़ा भी थोड़ी देर के लिए ही होता है।
  • यदि पति पत्नी के बीच बात अधिक बिगड़ रही हो तो अपने किसी विश्वास वाले से सलाह लें। बेटी को समझाएं कि गलती होने पर उसे सुधारने का प्रयास करे न कि मुंह फुला कर बैठ जाये।

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आप अपनी बेटी को अच्छे संस्कार और शिक्षा देंगे तो ये संस्कार उसके परिवार को खुशियों से भर देंगे। यही नहीं उसके सद्व्यवहार से दोनों परिवारों के बीच अच्छे सम्बन्ध बनेंगे। अपनी बेटी की ससुराल में माता पिता को कभी भी हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। आज लड़की के ससुराल में हस्तक्षेप करके उसका जीवन नरक बना दिया जाता है। उसे बैसाखी के सहारे चलने की आदत डाल दी जाती है। वे यह नहीं सोचते कि बेटी ने कोई छोटी उम्र में तो शादी नहीं की है, वह भी अपना भला—बुरा समझती है, पर माँ—बाप का बेटी के प्रति अति प्यार बेटी का जीवन बिगाड़ देता है। बेटी मनगढंत कहानियाँ बना कर माता—पिता को परोसती है और फिर शुरु हो जाती है तहकीकात। अंत में उनका एक ही कार्य रहता है कैसे लड़के वालों को नीचा दिखाना, कैसे उनसे लाखों रूपये निकलवाना तथा उन्हें कोर्ट—कचहरी में झूठा केस डालकर फसाना । उन्हें पता होता है कि कानून लड़कियों के लिये ही बना है। माता पिता का जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप बेटी के घर को हमेशा तोड़ता ही है, यह तो मेरी आँखों देखी बात है। (Ache Sanskar)

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इसलिए मेरा आप सब से यह निवेदन है अपनी बेटी को घर जोड़ना सिखाये , उसे घर तोडना ना सिखाये। और बेटी के कन्यादान के बाद उसके जीवन में दखल अंदाजी ज्यादा ना करे। आप शादी के समय अपनी बेटी को धन ना दे तो चलेगा परन्तु उसे अच्छे संस्कार अवश्य दे। आपके घर के बेटी किसी के घर की गरिमा बने, मर्यादा बने, उसे ऐसे संस्कार दे। (Ache Sanskar)

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धन्यवाद,
आपकी दोस्त,
ज्योति गोयनका

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