Achyutam keshavam lyrics

By | January 16, 2020
Achutam Keshvam Krishn Damodaram
(Achutam Keshvam Krishn Damodaram)

Achyutam keshavam krishna damodaram

अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी बल्लभम ।

(Krishna is known with many names. These are different names of Krishna. Singing and repeating the different Names of God is spiritually elevating and increases devotion for God. )

कौन कहता हे भगवान आते नहीं,
तुम भक्त मीरा के जैसे बुलाते नहीं।

(Who says God does not arrive? You don’t call her like Meera! Meera’s love and devotion for Krishna is well-known and also Krishna’s response to the intense loving call)

कौन कहता है भगवान खाते नहीं,
बेर शबरी के जैसे खिलाते नहीं।

(Who says God does not eat? You don’t feed her like Shabri fed! (Shabri’s long and loving await for Lord Rama and how Lord Rama accepted her food)

कौन कहता है भगवान सोते नहीं,
माँ यशोदा के जैसे सुलाते नहीं।

(Who says God does not Sleep? You don’t make him sleep like Maa Yasoda did! It needs total love for Krishna and wanting to give Him rest and sleep )

कौन कहता है भगवान नाचते नहीं,
गोपियों की तरह तुम नचाते नहीं।

(Who says God does not dance? You don’t make him dance like the Gopis!  The love of Gopis for Krishna is well-known, wherever they went, whatever they did, Krishna was on their heart and mind always. )

नाम जपते चलो काम करते चलो,
हर समय कृष्ण का ध्यान करते चलो।

याद आएगी उनको कभी ना कभी,
कृष्ण दर्शन तो देंगे कभी ना कभी।

Read also दुर्गा माता की आरती

अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं ( Bhajan in sanskrit)

अच्युतं केशवं रामनारायणं
कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम्।
श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं
जानकीनायकं रामचंद्रं भजे॥1॥

अच्युतं केशवं सत्यभामाधवं
माधवं श्रीधरं राधिकाराधितम्।
इन्दिरामन्दिरं चेतसा सुन्दरं
देवकीनन्दनं नन्दजं सन्दधे॥२॥

विष्णवे जिष्णवे शाङ्खिने चक्रिणे
रुक्मिणिरागिणे जानकीजानये।
बल्लवीवल्लभायार्चितायात्मने
कंसविध्वंसिने वंशिने ते नमः॥३॥

कृष्ण गोविन्द हे राम नारायण
श्रीपते वासुदेवाजित श्रीनिधे।
अच्युतानन्त हे माधवाधोक्षज
द्वारकानायक द्रौपदीरक्षक॥४॥

राक्षसक्षोभितः सीतया शोभितो
दण्डकारण्यभूपुण्यताकारणः।
लक्ष्मणेनान्वितो वानरौः सेवितोऽगस्तसम्पूजितो
राघव पातु माम्॥५॥

धेनुकारिष्टकानिष्टकृद्द्वेषिहा
केशिहा कंसहृद्वंशिकावादकः।
पूतनाकोपकःसूरजाखेलनो
बालगोपालकः पातु मां सर्वदा॥६॥

विद्युदुद्योतवत्प्रस्फुरद्वाससं
प्रावृडम्भोदवत्प्रोल्लसद्विग्रहम्।
वन्यया मालया शोभितोरःस्थलं
लोहिताङ्घ्रिद्वयं वारिजाक्षं भजे॥७॥

Read also शिव चालीसा /Shiv Chalisa

कुञ्चितैः कुन्तलैर्भ्राजमानाननं
रत्नमौलिं लसत्कुण्डलं गण्डयोः।
हारकेयूरकं कङ्कणप्रोज्ज्वलं
किङ्किणीमञ्जुलं श्यामलं तं भजे॥८॥

अच्युतस्याष्टकं यः पठेदिष्टदं
प्रेमतः प्रत्यहं पूरुषः सस्पृहम्।
वृत्ततः सुन्दरं कर्तृविश्वम्भरस्तस्य
वश्यो हरिर्जायते सत्वरम्॥९॥

श्री शङ्कराचार्य कृतं!

हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे कृष्णा

Category: Chalisa/Aarti

About jyotee Goenka

जय माता दी, मै ज्योति गोयनका आप सब का अपने इस ब्लॉग में स्वागत करती हूँ यह ब्लॉग मैंने माता रानी की प्रेरणा से हमारे समाज में धरम प्रचार का एक छोटा सा प्रयास करने के लिए बनाया है, माता रानी ने मेरे जीवन में बहुत से चमत्कार किये है, मेरा यह मानना है की सच्ची भक्ति और श्रदा से भाग्य में लिखा हुआ भी बदल सकता है, धरम के मार्ग पर चलकर किसी का बुरा नहीं हो सकता, इसी विश्वास को लेकर मैंने यह एक धार्मिक ब्लॉग बनाया है, आशा करती हूँ , मेरा यह प्रयास आप सबको पसंद आएगा, इस विषय में यदि आपके कुछ सुझाव हो मुझे अवशय लिखे , जय माता दी, ज्योति गोयनका

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *