सभी मनोकामनाओ को पूर्ण करते है दुर्गा सप्तशती के कुछ सिद्द सम्पुट मन्त्र /Durga Saptshati

By | September 30, 2019
durga sapshati

Durga Saptshati ke Mantra /दुर्गा सप्तशती के मन्त्र

श्रीमार्कण्डेयपुराणान्तर्गत देवीमाहात्म्य में “श्लोक”, “अर्ध श्लोक” और “उवाच” आदि मिलाकर कुल 700 मन्त्र है | यह माहात्म्य दुर्गा सप्तशती (Durga Saptshati )के नाम से प्रसिद्द है | यह ग्रन्थ सप्तशती अर्थ, काम, मोक्ष — चारों पुरषार्थो को प्रदान करने वाली है | जो पुरष जिस भाव और जिस कामना से श्रद्धा एवं विधि के साथ सप्तशती का पारायण करता है, उसे उसी भावना और कामना के अनुसार निश्चय ही फल सिद्दी होती है |इस बात का अनुभव अगणित पुरषों को प्रत्यक्ष हो चूका है |

माता लक्ष्मी को पाने के लिए पूजे नारायण को

यहाँ हम कुछ ऐसे चुने हुए मंत्रो का उल्लेख करते है, जिनका सम्पुट देकर विधिवत पारायण करने से विभिन्न पुरषार्थो की व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से सिद्दी होती है | इनमे अधिकांश सप्तशती (Durga Saptshati) के ही मन्त्र है और कुछ बाहर के भी है,इन मंत्रो के विधिवत जाप से मनुष्य की सभी मनोकामनाए पूर्ण होती है |

बहुत प्रभावशाली हैं दुर्गा सप्तशती (Durga Saptshati ) के ये मंत्र
शास्‍त्रों के अनुसार दुर्गा सप्‍तशती के ये मंत्र अत्यन्त चमतकारी है, यदि सच्‍ची श्रद्धा के साथ और पूर्ण विश्‍वास के साथ इन मंत्रों का जाप किया जाए कोई भी असंभव कार्य पूर्ण हो सकता है । माँ दुर्गा के ये पवित्र मंत्र शीघ्र ही असर दिखाते हैं । नवरात्र के समय इन मंत्रों का जाप बहुत ही लाभकारी होता है ।

Durga Saptshati ke Mantra /दुर्गा सप्तशती के मन्त्र

(1) सामूहिक कल्याण के लिए
देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या
निश्शेषदेवगणशक्ति समूहमूत्र्या।
तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां
भक्त्या नता: स्म विदधातु शुभानि सा न:॥

(2) विश्व के अशुभ तथा भय नाश के लिए :
यस्या: प्रभावमतुलं भगवाननन्तो ब्रह्मा हरश्च न हि वक्तुमलं बलं च। सा चण्डिकाखिलजगत्परिपालनाय नाशाय चाशुभभयस्य मतिं करोतु।।

(3) विश्व की रक्षा के लिए :
या श्री: स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मी:
पापात्मनां कृतधियां हृदयेषु बुद्धि:।
श्रद्धा सतां कुलजनप्रभवस्य लज्जा
तां त्वां नता: स्म परिपालय देवि विश्वम्॥ अर्थ :- जो पुण्यात्माओं के घरों में स्वयं ही लक्ष्मीरूप से, पापियों के यहाँ दरिद्रतारूप से, शुद्ध अन्त:करणवाले पुरुषों के हृदय में बुद्धिरूप से, सत्पुरुषों में श्रद्धारूप से तथा कुलीन मनुष्य में लज्जारूप से निवास करती हैं, उन आप भगवती दुर्गा को हम नमस्कार करते हैं। देवि! आप सम्पूर्ण विश्व का पालन कीजिये।

(4)विश्व के अभ्युदय के लिये:-
विश्वेश्वरि त्वं परिपासि विश्वं 
विश्वात्मिका धारयसीति विश्वम्।
विश्वेशवन्द्या भवती भवन्ति 
विश्वाश्रया ये त्वयि भक्ति नम्रा:॥ अर्थ :- विश्वेश्वरि! तुम विश्व का पालन करती हो। विश्वरूपा हो, इसलिये सम्पूर्ण विश्व को धारण करती हो। तुम भगवान् विश्वनाथ की भी वन्दनीया हो। जो लोग भक्तिपूर्वक तुम्हारे सामने मस्तक झुकाते हैं, वे सम्पूर्ण विश्व को आश्रय देनेवाले होते हैं।

(5) विपत्ति नाश के लिए-
शरणागतर्द‍िनार्त परित्राण पारायणे।
सर्व स्यार्ति हरे देवि नारायणि नमोऽतुते॥

(6) आरोग्य एवं सौभाग्य प्राप्ति के लिए : देहि सौभाग्यं आरोग्यं देहि में परमं सुखम्‌।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

(7) ऐश्वर्य, सौभाग्य, आरोग्य, संपदा प्राप्ति एवं शत्रु भय मुक्ति के लिए-  ऐश्वर्य यत्प्रसादेन सौभाग्य-आरोग्य सम्पदः।
शत्रु हानि परो मोक्षः स्तुयते सान किं जनै॥

(8) विपत्तिनाश और् शुभ की प्राप्ति के लिये:- करोतु सा नः शुभहेतुरीश्वरी शुभानि भद्राण्यभिहन्तु चापदः ।

(9)भयनाश के लिये:- सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते । भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि

durga saptshati

(10) रोगनाश के लिये:- रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान् । त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति ॥

(11) महामारीनाश के लिये:- जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी । दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते ॥

(12) सुलक्षणा पत्नी की प्राप्ति के लिये:- पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम् । तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम् ॥

(13) दारिद्र्यदुःखादिनाश के लिये:- दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि । दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदाऽऽर्द्रचित्ता ॥

(14) भुक्तिमुक्ति की प्राप्ति के लिये:- विधेहि देवि कल्याणं विधेहि परमां श्रियम् । रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ॥

दुर्गा सप्तशती के मन्त्र जाप के नियम :

अपनी आवश्यकता अनुसार मंत्र का चुनाव करें.

नवरात्रि में मंत्र जाप की शुरुआत करें, तो अति उत्तम

कम से कम रोज तीन माला जाप करें और लगातार नौ दिनों तक करें.

इस दौरान सात्विक रहें. अगर उपवास रखें तो और भी उत्तम होगा.

मंत्र जाप लाल चंदन या रुद्राक्ष की माला से करें.

श्रद्धा और भक्ति से इन मंत्रो का जाप किये जाने पर माँ दुर्गा के कृपा प्राप्त होती है और जीवन में कई चमत्कारिक लाभ होते है l

जय माता दी , जय माता दी, जय माता दी, जय माता दी, जय माता दी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *