गणेश जी ने तुलसी को श्राप क्यों दिया | Ganesh ji ki kahani

vinayak/Ganesh ji ki kahaniभगवान् गणेश जो महादेव और माता पारवती के पुत्र है , श्री कार्तिकेय जी इनके बड़े भाई है और बहन का नाम अशोक सुंदरी है। जो मूषक की सवारी करते है। जो प्रत्येक कार्य में और प्रत्येक पूजा में सर्वप्रथम पूजे जाते है। इन्ही भगवान् गणेश को प्रसन्न करने के लिए गणेश चतुर्थी पर इनका उपवास किया जाता है, इन्हे मोदक अथार्त लड्डुओं का भोग लगाया जाता है तथा इन्हें लाल रंग के पुष्प अर्पित किये जाते है। भगवान् गणेश को दूर्वा बहुत प्रिय है , इसलिए दूर्वा भगवान् गणेश को अर्पित की जाती है।

परन्तु तुलसी पत्र भगवान् गणेश को कभी अर्पित नहीं किये जाते। क्योंकि तुलसी पत्र , भगवान् गणेश को अप्रिय है , इतने अप्रिय की गणेश पूजा में इसका प्रयोग बिलकुल वर्जित माना गया है। जो तुलसी पत्र भगवान् विष्णु को अत्यंत प्रिय है , वही तुलसी पत्र भगवान् गणेश को इतनी अप्रिय क्यों है , इसी विषय में एक पौराणिक कथा प्रचलित है।

Ganesh ji ki kahani

एक समय की बात है , श्री गणेश गंगा नदी के किनारे नेत्र बंद कर घोर तपस्या कर रहे थे। उन्ही दिनों में राजा धर्मात्वज की नवयौवना कन्या तुलसी ने अपने पिता से विवाह की इच्छा प्रकट की और कहा :

हे पिता श्री , मै एक सुयोग्य वर की तलाश में तीर्थ यात्रा पर जाना चाहती हूँ। आप मुझे अपना आशीवार्द देकर विदा करे। “

राजा धर्मात्वज ने अपनी पुत्री को ख़ुशी ख़ुशी तीर्थ यात्रा के लिए अनुमति दे दी। देवी तुलसी सभी तीर्थ स्थलों का भ्रमण करने लगी और भ्रमण करते करते एक दिन वह गंगा नदी के तट पर पहुंची। गंगा नदी के तट पर उन्होंने युवा तरुण भगवान् गणेश को देखा जो घोर तपस्या में विलीन थे।

शास्त्रों के अनुसार तपस्या में विलीन भगवान् गणेश जी रत्न जटित सिहांसन पर विराजमान थे। उनके समस्त अंगो पर चंदन लगा हुआ था। उनके गले में पारिजात पुष्पों के साथ स्वर्ण मणि रत्नों के अनेक हार पड़े थे। उनकी कमर में अत्यंत कोमल रेशम का पीताम्बर लिपटा हुआ था। भगवान् गणेश के इसी रूप लावण्य को देख कर देवी तुलसी उन पर मोहित हो गयी।उनके मन में भगवान गणेश से विवाह करने की तीव्र इच्छा जाग उठी।

इस इच्छा के जागृत होने पर उन्होंने प्रेम भरी वाणी से भगवान् गणेश को पुकारा। देवी तुलसी के पुकारने पर कुछ समय के बाद भगवान् गणेश ने अपने नेत्रों को खोला और पूछा

” हे देवी , तुम कौन हो , तुमने मुझे क्यों पुकारा। ”

भगवान् गणेश की बात सुनकर देवी तुलसी ने लज्जाते हुए उनसे अपने विवाह की इच्छा प्रकट की । देवी तुलसी की बात सुनकर भगवान् गणेश ने कहा :

देवी, मुझे माफ़ करो , मै तुमसे विवाह नहीं कर सकता। इस समय मै घोर तपस्या में लीन हूँ और अपनी इस तपस्या को मै अधूरी नहीं छोड़ सकता। और वैसे भी देवी मै तो ब्रह्मचारी जीवन बिताना चाहता हु , इसलिए मेरे लिए विवाह के विषय में सोचना भी अंसभव है , अंत : तुम यहाँ से चली जाओ “”

विघ्नहर्ता भगवान् गणेश के ऐसा कहने पर देवी तुलसी बहुत दुखी हुई और कुछ समय के बाद क्रोध के कारण वह कांपने लगी और भगवान् गणेश से बोली :

हे देव, तुमने मुझे अस्वीकार किया है, यह तुमने अच्छा नहीं किया। इसलिए अब में तुम्हे शाप देती हूँ की ” तुम्हारे एक नहीं बल्कि दो दो विवाह होंगे। “

भगवान् गणेश वैसे तो अत्यंत कोमल स्वभाव के थे परन्तु देवी तुलसी के इस शाप को सुनकर वह भी क्रोधित हो उठे और उन्होंने देवी तुलसी को शाप दिया

” तुलसी सुनो, में पार्वती पुत्र , तुम्हे शाप देता हूँ की तुम्हारा विवाह एक दानव के साथ होगा और तुम्हे अत्यंत दुःख और कष्ट भोगने पड़ेंगे। “

भगवान् गणेश का यह शाप सुनकर देवी तुलसी बहुत भयभीत हो गयी। उन्होंने गणेश जी से माफ़ी मांगी। तुलसी माता के इस प्रकार माफ़ी मांगने पर भगवान् गणेश का क्रोध शांत हुआ। और उन्होंने अत्यंत कोमल वचनो में कहा :

देवी तुलसी सुनो , मेरा यह शाप मिथ्या नहीं हो सकता। कुछ समय के बाद तुम्हारा विवाह शंखचूर्ण नामक एक दैत्य के साथ होगा। और उसके बाद तुम एक पौधे के रूप में बदल जाओगी। तुम्हारे उस पौधे को यह पूर्ण संसार तुलसी माता के नाम से जानेगा और तुम्हारी पूजा करेगा। तुम भगवान् विष्णु और भगवान कृष्ण की सदा प्रिया रहोगी। कलयुग में तुम प्राणी मात्र को जीवन और मोक्ष प्रदान करने वाली होगी। कुछ ही समय के बाद तुम्हारे उस रूप का विवाह भगवान् विष्णु जी के ही रूप शालिग्राम जी के साथ होगा। परन्तु देवी मेरी पूजा में तुम्हारा प्रयोग वर्जित होगा। गणेश पूजा में तुलसी पत्र का प्रयोग करना अशुभ माना जायेगा।”

और इस प्रकार भगवान् गणेश का यह शाप सत्य साबित हुआ। कुछ समय के बाद देवी तुलसी का विवाह शंखचूड़ के साथ हुआ। और उसके पश्चात उन्होंने एक पौधे के रूप में भी जन्म लिया। और उसी समय से गणेश जी पूजा में तुलसी पत्र का प्रयोग करना अशुभ माना जाता है।

गणेश वंदना को सुनने के लिए आप इस audio को download कर सकते है” :

Ganesh vandana

जय गणेश भगवान् जय गणेशा जय गणेश भगवान्

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