Lohri 2020 festival in hindi |history of lohri in hindi

By | November 20, 2019

lohri 2020 – हमारा देश भारतवर्ष (India) त्योहारों और पर्वो (festivals)का देश है І यहाँ प्रत्येक राज्य (state) और प्रान्त में कुछ खास पर्व मनाये जाते है जो उस राज्य की विशेषता को दर्शाते है І परन्तु ये पर्व (festivals) केवल उस राज्य तक सीमित ना रह कर भारत वर्ष के कई और राज्यों और हिस्सों में भी मनाये जाते है І यही कारण है की भिन्न भिन्न राज्यों, भिन्न भिन्न त्योहारों , भिन्न भिन्न भाषाओं (languages), भिन्न भिन्न लोक रिवाजों, भिन्न भिन्न भोजन (food), इत्यादि के होते हुए भी हमारा भारतवर्ष (India) एक है І

यहाँ प्रत्येक राज्य (State) में मनाये जाने वाले कुछ खास पर्व (festivals) होते है जो उस राज्य में बड़ी धूमधाम के साथ मनाये जाते है 丨ऐसा ही पंजाब राज्य (Punjab) में मनाया जाने वाला एक बहुत ही सूंदर त्यौहार (festival) है, जिसका नाम है “लोहड़ी” …… लोहड़ी का नाम आते ही ध्यान आता है – जाड़ों में जलती हुई आग (Bonfire), आग के सामने रंग बिरंगी पोशाक पहने नृत्य (dance) करते हुए तथा मूंगफली – रेबडी खाते हुए लोग !!!

Lohri 2020 festival in hindi introduction(lohri 2020)

लोहडी का यह सूंदर त्यौहार (lohri festival) पंजाब और पंजाब से जुड़ते हुए हरियाणा (haryana) राज्य में बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है 丨यह त्यौहार मकर सक्रांति (Makar Sakranti) के ठीक एक दिन पहले मनाया जाता है 丨 यह त्यौहार प्रत्येक वर्ष (every year) पौष मास की अंतिम रात्रि को हर्षपूर्वक मनाया जाता है 丨 लोहड़ी का यह त्यौहार पंजाबी तथा हरियाणा के लोगो का प्रमुख त्यौहार (festival) माना जाता है | यह त्यौहार (festival) पंजाब, हरियाणा , दिल्ली, जम्मू काश्मीर और हिमाचल में धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है |

history of lohri in hindi (lohri 2020)

लोहड़ी त्यौहार (lohri festival) के विषय में काफी मान्यताएं है जो की पंजाब राज्य से जुडी हुई मानी जाती है | ऐसी मान्यता है की यह त्यौहार जाड़े की ऋतू (winter season) के आने के घोतक के रूप में मनाया जाता है | लोहड़ी शब्द का यदि संधि छेद किया जाये तो ल – (लकड़ी ) , ओह (गोहा – सूखे उपले ) + दी (रेबड़ी ) = लोहड़ी के प्रतीक है | प्राचीन काल (ancient time) में ऋतुर्यज्ञ का अनुष्ठान मकर सक्रांति के दिन होता था , सम्भवत : लोहड़ी उसी का अवशेष है | पूस माघ की कड़कड़ाती सर्दी से बचने के लिए आग (fire) बहुत सहायक सिद्द होती है और आग की यही व्यवहारिक आवश्यकता “लोहड़ी” को मौसमी पर्व (seasonal festival) का स्थान देती है |

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इस दिन जगह−जगह युवक एकत्रित होकर ढोल की थाप पर भांगड़ा करते हैं और एक दूसरे को लोहड़ी की बधाइयां देते हैं। महिलाएं (women) भी खेतों की हरियाली के बीच अपनी चुनरी लहराते हुए उमंगों को नयी उड़ान देती हुई प्रतीत होती हैं। महिलाएं (women) इस पर्व (festival) की तैयारी कुछ दिन पहले से ही शुरू कर देती हैं और समूहों में एकत्रित होकर एक दूसरे के हाथों में विभिन्न आकृतियों वाली मेहंदी रचाती हैं। पंजाब (punjab) में नई बहू और नवजात बच्चे (newly born) के लिए तो लोहड़ी का विशेष महत्व होता है। इस दिन रेवड़ी और मूंगफली वितरण के साथ ही मक्के की रोटी और सरसों के साग का भोज भी आयोजित किया जाता है।

लोहड़ी को पहले तिलोड़ी कहा जाता था 丨यह शब्द तिल तथा रोड़ी (गुड़ की रोड़ी) शब्दों के मेल से बना है जो समय के साथ साथ लोहड़ी शब्द में परिवर्तित हो गया 丨

lohri kyu manaya jata hai (lohri 2020)

इस पर्व (festival) के मनाये जाने के पीछे एक प्रचलित लोक कथा (story) भी है कि मकर संक्रांति के दिन कंस ने कृष्ण को मारने के लिए लोहिता नामक राक्षसी को गोकुल में भेजा था, जिसे कृष्ण ने खेल–खेल में ही मार डाला था। उसी घटना की स्मृति में लोहिता का पावन पर्व मनाया जाता है। सिन्धी समाज में भी मकर संक्रांति से एक दिन पूर्व ‘लाल लाही’ के रूप में इस पर्व को मनाया जाता है। माना जाता है इस दिन धरती सूर्य से अपने सुदूर बिन्दु से फिर दोबारा सूर्य की ओर मुख करना प्रारम्भ कर देती है। यह पर्व खुशहाली के आगमन का प्रतीक भी है। साल के पहले मास जनवरी में जब यह पर्व मनाया जाता है उस समय सर्दी का मौसम जाने को होता है। इस पर्व की धूम उत्तर भारत खासकर पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में ज्यादा होती है। कृषक समुदाय में यह पर्व उत्साह और उमंग का संचार करता है क्योंकि इस पर्व तक उनकी वह फसल पक कर तैयार हो चुकी होती है जिसको उन्होंने अथक मेहनत से बोया और सींचा था। पर्व के दिन रात को जब लोहड़ी जलाई जाती है तो उसकी पूजा गेहूं की नयी फसल की बालों से ही की जाती है। 

लोहड़ी का त्यौहार और दुल्ला भट्टी की कहानी ( Dulla Bhatti ki kahani)

लोहड़ी के सूंदर त्यौहार पर दुल्ला भट्टी का लोक प्रिय गीत गाया जाता है | लोहड़ी पर्व के गीतों का केंद्र बिंदु दुल्ला भट्टी को ही बनाया जाता है | आखिर यह दुल्ला भट्टी कौन है , जिनका नाम लोहड़ी के प्रत्येक गीत में आता है |  दुल्ला भट्टी की कहानी इस प्रकार से है

दुल्ला भट्टी की कहानी  (Lohri 2020)

कहा जाता है की यदि दुल्ला भट्टी ना होते तो लाहौर , लाहौर ना होता, सलीम कभी जहांगीर ना बन पाता, मुग़ल शासक अकबर को भांड ना बनना पड़ता | पंजाब वाले दुल्ला भट्टी का गीत ना गाते  और यह लोहड़ी का त्यौहार(lohri festival) भी ना होता | यह बात मुग़ल शासक अकबर के समय की है | बाघा बार्डर से लगभग 200 किलो मीटर दूर, पाकिस्तान से लगते हुए पंजाब राज्य में पिंडी भटिया नामक एक स्थान (place) है | उसी स्थान पर सन 1547 में लद्दी और फरीद खान के यहाँ राय अब्दुल्ला खान का जन्म हुआ , जिन्हे आज पूरी दुनिया दुल्ला भट्टी के नाम से जानती है | वह राजपूत मुसलमान थे | उनके जन्म के 4 महीने पहले ही उनके दादा संदल भट्टी और पिता को हमायुं ने मरवा दिया था | उनका अपराध यह था की उन्होंने मुगल शासको को लगान देने से मना कर दिया था | उनका अपराध यह था की उन्होंने मुग़ल शासको को लगान देने से मना कर दिया था | इसी कारण ने हमायुँ ने उनकी खाल में भूसा भरवा कर उन्हें गांव के बाहर लटका दिया था |  आज भी गॉव वाले हमायुं की बर्बरता के किस्से कहते है :

” तेरा सांदल दादा मारया , दित्ता बोरे विच पा , मुगला पुठिया खाला ला के , भरया नाल हवा “

जब दुल्ला भट्टी कम उम्र (age) के थे तो उन्हें अपने पिता (fatehr) और दादा (grand father) के हश्र का पता ना चला | परन्तु जब वह युवा हुए तब उन्हें पता चला की उनके पिता और दादा के साथ क्या हुआ था | दुल्ला भट्टी उस समय एक नायक (hero) की तरह माने जाते थे | उन्हें “पंजाब के नायक ” की उपलब्धि से सम्मानित किया गया था | परन्तु अकबर उन्हें एक डाकू की तरह मानता था | कारण दुल्ला भट्टी, अकबर के आमिर जमीदारो से , रईसों से, सिपाईयों से धन और समान लुटते और उस धन को गरीबो में बांटते थे और इसी कारण वह अकबर की आँखों में खटकते थे | उन्होंने अकबर के शासन में इतनी अधिक लूटपाट की की अकबर को अपनी राजधानी आगरा से लाहौर शिफ्ट करनी पड़ी | इस प्रकार हिंदुस्तान का शहंशाह कहलाने वाला अकबर उस दुल्ला भट्टी से भयभीत रहता था  |

अकबर के शासन काल में सब जगह मुग़ल सरदारों का आंतक छाया हुआ था | उसी राज्य के एक गॉव में सुन्दरदास नाम का एक गरीब किसान रहता था | उसकी दो बेटियाँ थी – सुंदरी और मुंदरी ”  | उस गॉव के नंबरदार की नियत उन दोनों लड़कियों पर सही नहीं थी |   वह सुन्दरदास को यह धमकी देता रहता था की वह अपनी बेटियों की शादी उसके साथ करदे, वरना उसके लिए अच्छा नहीं होगा | सुंदरदास बहुत भयभीत रहने लगा, उसने अपनी परेशानी दुल्ला भट्टी को बताई | यह सुनकर दुल्ला भट्टी नंबरदार के गॉव जा पहुंचा | उसने गुस्से में आकर नंबरदार के सारे खेत जला दिए और  उसकी  बेटियों की शादी वहाँ की जहाँ सुंदरदास चाहता था |  और शादी के शगुन में उसने शक्कर और गुड़ दिया, उस शुभ दिन को पुरे गांव ने हर्षपूर्वक मनाया | उस दिन से प्रत्येक वर्ष जब फसल कट कर घर आती है, किसान आग जला कर उसमे गेहूँ की बालियां डालते, गुड़ , शक्कर , रेबड़ी खाते, आग के चारो और ख़ुशी से नृत्य करते और यह गीत गाते : 

Sunder mundriye ho!
Tera kaun vicharaa ho!
Dullah Bhatti walla ho!
Dullhe di dhee vyayae ho!
Ser shakkar payee ho!
Kudi da laal pathaka ho!
Kudi da saalu paata ho!
Salu kaun samete!
Chache choori kutti! zamidara lutti!
Zamindaar sudhaye!
Bade bhole aaye!
Ek bhola reh gaya!
Sipahee far ke lai gaya!
Sipahee ne mari itt!
Sanoo de de Lohri, te teri jeeve jodi!
(Cry or howl!)
Bhaanvey ro te bhaanvey pitt!

और वह ख़ुशी का दिन लोहड़ी (Lohri) के नाम से जाना जाने लगा तथा इस प्रकार लोहड़ी के त्यौहार (lohri festival) का जन्म हुआ | प्रत्येक वर्ष (every year) 13 जनवरी को लोहड़ी का यह सूंदर त्यौहार मनाया जाने लगा | लोहड़ी की अग्नि में आशीर्वाद (blessings) देने के लिए मूंगफली, रेबड़ी और फुल्ले अर्पित किये जाते |  दुल्ला भट्टी की कहानी और उसका लोकप्रिय गीत  बुराई पर अच्छाई का प्रतीक माना जाता है |

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जय माता दी, मै ज्योति गोयनका आप सब का अपने इस ब्लॉग में स्वागत करती हूँ यह ब्लॉग मैंने माता रानी की प्रेरणा से हमारे समाज में धरम प्रचार का एक छोटा सा प्रयास करने के लिए बनाया है, माता रानी ने मेरे जीवन में बहुत से चमत्कार किये है, मेरा यह मानना है की सच्ची भक्ति और श्रदा से भाग्य में लिखा हुआ भी बदल सकता है, धरम के मार्ग पर चलकर किसी का बुरा नहीं हो सकता, इसी विश्वास को लेकर मैंने यह एक धार्मिक ब्लॉग बनाया है, आशा करती हूँ , मेरा यह प्रयास आप सबको पसंद आएगा, इस विषय में यदि आपके कुछ सुझाव हो मुझे अवशय लिखे , जय माता दी, ज्योति गोयनका

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