Mata Lakshmi ki Aarti /लक्ष्मी माता की आरती, ओम जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता/Jayalakshmi Mata Ki

माँ वैष्णो देवी की तीन रूपों माता काली, माता लक्ष्मी और माता सरस्वती में से माता लक्ष्मी हिन्दू धर्म की एक प्रमुख देवी मानी जाती है | माता लक्ष्मी धन, सम्पदा, शान्ति और समृद्धि की देवी मानी जाती हैं। जिस मनुष्य पर माता लक्ष्मी की कृपा हो जाती है, उसके घर में सुख , समृद्धि, ऐश्वर्य आदि स्वयं ही आ जाते है, जिसके घर में माँ लक्ष्मी का निवास होता है, उसी को इस समाज में मान सम्मान, रिश्ते नाते, सगे संबंधी आदि का सुख प्राप्त होता है ।

Jayalakshmi Mata Ki

धन की देवी माता लक्ष्मी भगवान् विष्णु की पत्नी है । एक कथा के अनुसार माता लक्ष्मी की उत्पत्ति समुद्र मंथन के दौरान निकले रत्नों के साथ हुई थी, लेकिन दूसरी कथा के अनुसार वे भृगु ऋषि की बेटी हैं | ऐसा माना जाता है की कार्तिक मास की अमावस्या की रात्रि अथार्त दिवाली की रात्रि को माता लक्ष्मी इस धरती पर भ्रमण के लिए निकलती है | इसी कारण दिवाली की रात्रि को माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए उनकी विधिवत पूजा की जाती है और पूजा के अंत में उनकी आरती की जाती है | माता लक्ष्मी की आरती इस प्रकार से है :

Mata Lakshmi ki Aarti

ओम जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥

उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता। सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥

Jayalakshmi Mata Ki

दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता। जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥

तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता। कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥

जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता। सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता। खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥

शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता। रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥ (Mata Lakshmi ki Aarti )

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