शिवजी को प्रसन्न करने के लिए करें प्रदोष व्रत, जानिए प्रदोष व्रत कथा (Pradosh Vrat Katha)

By | August 7, 2019

प्रदोष व्रत कथा (Pradosh Vrat Katha)

हिन्दु  धर्म में देवी देवताओँ को प्रसन करने और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए उनकी विधिवत पूजा की जाती है और उनका उपवास किया जाता है | ऐसा ही भगवान शिव की कृपा को प्राप्त करने के लिए और जन्म कुंडली के सभी दोषो  के निवारण के लिए एक व्रत किया जाता है, जिसका नाम है “प्रदोष व्रत

हिन्दु पंचांग के अनुसार प्रत्येक मास के दोनों पक्षों (शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष) में आने वाली त्रयोदशी के दिन संध्या के समय को प्रदोष कहा जाता है और इसी प्रदोष काल में यह प्रदोष व्रत किया जाता है | सूर्यास्त के बाद रात्रि के प्रथम पहर को जिसे सायंकाल अथवा तीसरा पहर भी कहा जाता है | यह प्रदोष व्रत एक मास में 2 बार किया जाता है और इस प्रकार वर्ष में 24 प्रदोष व्रत आते है  | हर तीसरे वर्ष एक अधिक मास आता है, उस वर्ष इस व्रत की संख्या बढ़ कर 26 हो जाती है |

यह प्रदोष व्रत पूर्ण रूप से भगवान् शिव को समर्पित है | प्रदोष व्रत का फल सप्ताह में आने वाले सभी वारो के अनुसार अलग अलग होता है :

  • सोम प्रदोष व्रत: यह सोमवार को आता है इसलिए इसे ‘सोम प्रदोष’ कहा जाता है। इस दिन व्रत रखने से भक्तों के अन्दर सकारात्मक विचार आते है और वे अपने जीवन में सफलता प्राप्त करते है।
  • मंगल प्रदोष या भोम प्रदोष व्रत: जब प्रदोष व्रत मंगलवार को आता है तो इसे ‘भौम प्रदोष’ कहा जाता है। इस व्रत को रखने से भक्तों की स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याए दूर होती है और उनके शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार आता है। भोम प्रदोष व्रत जीवन में समृद्धि लाता है।
  • बुध प्रदोष या सौम्य वारा प्रदोष व्रत: सौम्य वारा प्रदोष बुधवार को आता है। इस शुभ दिन पर व्रत रखने से भक्तों की इच्छाएं पूरी होती है और ज्ञान भी प्राप्त होता हैं।
  • गुरु प्रदोष व्रत : यह व्रत गुरुवार को आता है और इस उपवास को रख कर भक्त अपने सभी मौजूदा खतरों को समाप्त कर सकते हैं। इसके अलावा गुरुवार प्रदोष व्रत रखने से पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है।
  • शुक्र प्रदोष या भृगु वारा प्रदोष व्रत: जब प्रदोष व्रत शुक्रवार को मनाया जाता है तो उसे भृगु वारा प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस व्रत को करने से जीवन से नकारात्मकता समाप्त होती है और सफलता मिलती है।
  • शनि प्रदोष व्रत : शनि प्रदोष व्रत शनिवार को आता है और सभी प्रदोष व्रतों में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। जो व्यक्ति इस दिन व्रत रखता है वह खोये हुए धन की प्राप्ति करता है और जीवन में सफलता प्राप्त करता है।
  • रवि प्रदोष या भानु वारा प्रदोष व्रत : यह रविवार को आता है और भानु वारा प्रदोष व्रत का लाभ यह है कि भक्त इस दिन उपवास को रखकर दीर्घायु और शांति प्राप्त कर सकते है।

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आइये अब जानते है सोम प्रदोष व्रत कथा

स्कन्द पुराण में प्रदोष व्रत और उसकी कथा का बहुत ही सूंदर उल्लेख मिलता है l स्कन्द पुराण में वर्णित एक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में किसी गांव में एक गरीब ब्राह्मण रहता था l परन्तु उस ब्राह्मण की मृत्यु अल्पायु में ही हो गयी थी l उसकी मृत्यु के पश्चात उसकी विधवा पत्नी भरण पोषण के लिए भीख मांगने लगी l वह ब्राह्मणी हर रोज सुबह अपने पुत्र के साथ भीख मांगने जाती और संध्या के समय अपने घर वापिस आती थी l एक दिन उस ब्राह्मणी की मुलाकात विदर्भ देश के राजकुमार से हुई जो अपने पिता की मृत्यु के पश्चात इधर उधर भटक रहा था l

दयावश वह ब्राह्मणी उस राजकुमार को अपने घर ले गयी | और अपने पुत्र की भांति उस राजकुमार का पालन पोषण करने लगी |एक दिन वह ब्राह्मणी दोनों पुत्रो के साथ शांडिल्य मुनि के आश्रम में गयी | वहाँ उस आश्रम में उसने भगवान् शिव के प्रदोष व्रत की कथा सुनी | अब तो वह ब्राह्मणी भी उस व्रत को नियमपूर्वक करने लगी |

एक समय की बात है, वे दोनों बालक वन में घूम रहे थे | कुछ समय के बाद उस ब्राह्मणी का पुत्र तो घर वापिस आ गया परन्तु वह राजकुमार उसी वन में रह गया | वन में उस राजकुमार ने गंधर्व कन्याओं को क्रीड़ा करते हुए देखा तो वह भी उन कन्याओं से बातें करने लगा | उनमे से एक कन्या का नाम अंशुमती था | उस दिन वह राजकुमार घर देरी से लौटा | दूसरे दिन वह राजकुमार फिर उसी वन में पहुंचा | जहाँ अंशुमती अपने माता पिता से बात कर रही थी | उसके माता पिता ने जब राजकुमार को देखा तो तुरंत पहचान लिया की वह विदर्भ नगर के राजकुमार “धर्मगुप्त ” है | भगवान् शिव की कृपा से अंशुमती के माता पिता को वह राजकुमार बहुत पसंद आ गया और उन्होंने अपनी पुत्री का विवाह उसके साथ करने का निश्चय किया | और कुछ ही दिनों के बाद राजकुमार और अंशुमती का विवाह हो गया |

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विवाह के बाद राजकुमार ने गंधर्वो की विशाल सेना के साथ विदर्भ देश पर हमला कर दिया और घमासान युद्ध कर विजय प्राप्त की तथा पत्नी के साथ राज्य करने लगा | वह अपने महल में उस ब्राह्मणी और उसके पुत्र को भी आदर के साथ ले आया और उन्हें आदर के साथ रखने लगा | इस प्रकार उस ब्राह्मणी और उसके पुत्र के सभी दुःख दूर हो गए और वे सुखपूर्वक जीवन वयतीत करने लगे | एक दिन अंशुमती ने राजकुमार से यह प्रश्न किया ” हे स्वामी, यह सब किस देवता की कृपा से हुआ है ” तब राजकुमार ने अंशमती को प्रदोष व्रत के महत्व और इससे प्राप्त होने वाले फल के बारे में बताया |

उसी दिन से अंशुमती ने अपने राज्य में यह घोषणा करवा दी की सभी लोग भगवान् शिव के इस प्रदोष व्रत को करेंगे और उसी समय से प्रदोष व्रत की प्रतिष्ठा और महत्व बढ़ गया तथा मान्यतानुसार लोग यह व्रत करने लगे | इस व्रत को करने से मनुष्य के सभी कष्ट और पाप नष्ट हो जाते है और मनुष्य को अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है |

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जय भोलेनाथ   जय भोलेनाथ  जय भोले नाथ जय भोले नाथ

माता रानी की प्रेरणा से मैं हमारे समाज में धर्म प्रचार का एक छोटा सा प्रयास कर रही हूँ , इसीलिए यह religious Blog और एक Youtube Channel बनाया है, यह Blog आपको कैसा लगा और यदि इस Blog के लिए आपकी कुछ suggestions हो तो मुझे Comments Box मे लिख कर भेजे I

धन्यवाद
ज्योति गोयनका

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जय माता दी, मै ज्योति गोयनका आप सब का अपने इस ब्लॉग में स्वागत करती हूँ यह ब्लॉग मैंने माता रानी की प्रेरणा से हमारे समाज में धरम प्रचार का एक छोटा सा प्रयास करने के लिए बनाया है, माता रानी ने मेरे जीवन में बहुत से चमत्कार किये है, मेरा यह मानना है की सच्ची भक्ति और श्रदा से भाग्य में लिखा हुआ भी बदल सकता है, धरम के मार्ग पर चलकर किसी का बुरा नहीं हो सकता, इसी विश्वास को लेकर मैंने यह एक धार्मिक ब्लॉग बनाया है, आशा करती हूँ , मेरा यह प्रयास आप सबको पसंद आएगा, इस विषय में यदि आपके कुछ सुझाव हो मुझे अवशय लिखे , जय माता दी, ज्योति गोयनका

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