माता सीता की अनसुनी कथा – आखिर क्यों किया माता सीता ने कुम्भकरण के पुत्र का वध /Sita mata ki kahani

Sita ji ki kahani

Sita Mata ki Kahani (सीता माता की कहानी)

दोस्तों , पवित्र ग्रन्थ रामायण (Ramayna) में ऐसी कई घटनाएं और कथाएं है , जिनके विषय में बहुत कम लोग जानते है। आज हम आपको ऐसी ही एक अनसुनी कथा बताने जा रहे है।

यह घटना उस समय की है जब भगवान् श्री राम (lord Rama), माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ वनवास काट कर अयोध्या वापिस आ गए थे। एक दिन भगवान् श्री राम अपने मंत्रियों सहित राज्य सभा में बैठे थे , कि तभी अचानक राजा विभीषण अपनी पत्नी और मंत्रियो सहित दौड़े दौड़े भगवान् श्री राम की सभा में पहुंचे। (Sita Mata ki kahani)

राजा विभीषण ने भगवान् श्री राम (lord Rama) से कहा ” हे प्रभु मेरी रक्षा करो , मेरी रक्षा करो। ” यह सुनकर भगवान् श्री राम (lord Rama) ने राजा विभीषण से उनकी परेशानी का कारण पूछा। तब राजा विभीषण ने भगवान श्री राम से कहा :

प्रभू , कुम्भकरण का एक पुत्र है , जिसका नाम है – मूलकासुर। मूलकासुर का जन्म मूल नक्षत्र में हुआ था। इसी कारण कुम्भकर्ण – मूलकासुर को एक जंगल में छोड़ आये थे। “

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जंगल में मधु मखियों ने मूलकासुर का पालन पोषण किया। अब जब रावण और कुम्भकर्ण का वध हो गया और लंका का शासन मैंने संभाला , तो यह बात मूलकासुर को मालूम हो गयी है। अब क्रोधित हो कर मूलकासुर ने मेरा और आपका वध करने की प्रतिज्ञा की है। इसलिए प्रभू , अब आप ही हम सबकी रक्षा करो। “

Sita Mata ki kahani

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यह सुनकर भगवान् श्री राम (lord Rama) ने अपने भाईयो , मंत्रियो और वानर सेना को युद्ध के लिए तैयार किया और लंका की और चल पड़े।

जब राक्षस मूलकासुर को भगवान श्री राम (lord Rama) और उनकी सेना के आने के बारे में मालूम हुआ तो वह युद्ध के इरादे से लंका के बाहर पहुंच गया। दोनों पक्षों की सेनाओ में करीब 7 दिन तक भयंकर युद्ध चलता रहा परन्तु कोई परिणाम ना निकला। तभी अचानक भगवान् ब्रह्मदेव, श्री राम के समक्ष प्रकट हो गए और बोले :

” हे राम , मूलकासुर का वध माता सीता के हाथो ही होगा। सुनो , एक दिन मूलकासुर ने ऋषि मुनीयों के समक्ष अपना शोक व्यक्त करते हुए यह कहा था : ” चंडी सीता के कारन ही मेरे कुल का विनाश हुआ है। “

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तब माता सीता के विषय में ऐसी अपमानजनक बात सुन कर एक ऋषि ने क्रोध में आकर मूलकासुर को यह श्राप दिया :

” जिस देवी को तुम चंडी कह रहे हो , उन्ही माता सीता के हाथो तुम्हारा अंत होगा। ” हे राम, मैंने भी एक समय मूलकासुर को यह वरदान दिया था की उसकी मृत्यु एक स्त्री के हाथो ही होगी , इसलिए हे राम , अब तुम माता सीता को यहाँ लेकर आओ।”

यह सुनते ही भगवान् श्री राम (lord Rama) ने हनुमान जी को माता सीता को लाने के लिए भेज दिया। माता सीता के आते ही भगवान् राम (lord Rama) ने उन्हें ब्रह्मा जी की यह सारी बात बताई। यह सुनते ही माता सीता क्रोधित हो गयी। क्रोध में आते ही उनके शरीर में से एक चंडी रूपी छाया निकली और यह छाया चंडी का रूप धारण कर मूलकासुर का वध करने के लिए आगे बढ़ी। आगे और पढ़े

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