SOMVAR VRAT KATHA/Somvar Vrat katha in hindi

By | June 15, 2019

सोमवार व्रत कथा

सोमवार का  व्रत पूर्ण रूप से भगवान् शिव को समर्पित है, इस दिन भगवान शिव का पूजन किया जाता है, उनका कच्चे दूध से अभिषेक किया जाता है, और इस व्रत कथा का श्रवण किया जाता है, इस व्रत में यथासंभव् एक समय मीठा भोजन ही करना चाहिए, ओम नमो शिवाय मंत्र का जाप करना चाहिए, इस व्रत को करने से अविवाहित कन्याओं को सुंदर वर की प्राप्ति होती है, और विवाहित महिलाओं को अखंड सुहाग का वर प्राप्त होता है  | सोमवार व्रत कथा

सोमवार व्रत कथा /Somvar Vrat Katha

बहुत समय पहले की बात है, एक गाँव में एक साहूकार रहता था | उसके पास धन-दौलत की कोई कमी नही थी लेकिन उसकी कोई सन्तान नही थी | इस कारण वह हर वक़्त अपने वंश के लिए चिंतित रहता था | वह प्रत्येक सोमवार को व्रत रखता था जिसमे दिन में वह भगवान शिव की पूजा करता था और शाम को शिवलिंग के समक्ष दिया जलाता था |

एक दिन माता पार्वती ने भगवान शिव से कहा “ हे नाथ , यह साहूकार, आपका परम भक्त है , आपको इसकी इच्छा पूरी करनी चाहिए ” | तब भगवान शिव ने कहा “ देवी पार्वती , यह संसार एक कर्मक्षेत्र है , जैसे एक किसान अपने खेत में बीज बोता है तो इसका परिणाम उसको मिलता है, उसी प्रकार इस संसार में मनुष्य जैसा कर्म करेगा उसको वैसा ही फल प्राप्त होगा|इस साहूकार के भाग्य में संतान सुख नहीं है” SOMVAR VRAT KATHA/Somvar Vrat katha in hindi 1

परन्तु माता पार्वती ने फिर शिवजी से आग्रह किया “हे प्रभु , फिर भी आप इसकी श्रद्धा को तो देखिये , यह आपका परम भक्त है आपको इसकी मदद करनी चाहिये , अगर आप लोगो की इच्छा पूरी नही करेंगे तो वो आपकी आराधना क्यों करेंगे ” | इस प्रकार माता पार्वती के जोर देने पर भोलेनाथ ने कहा “इस मनुष्य के कोई पुत्र नही है इसलिए यह सदैव चिंतित रहता है , हालांकि इसके भाग्य में पुत्र नही है फिर भी मै आपके आग्रह पर इसको पुत्र देने का वरदान देता हूँ लेकिन वह पुत्र केवल 12 वर्ष ही जीवित रह पायेगा , मै इससे ज्यादा कुछ नही कर सकता हूँ | ”

कुछ ही दिन के पश्चात साहूकार को भगवान शिव ने स्वप्न में दर्शन दिए और कहा ” हे साहूकार तुम्हारे घर एक पुत्र का जनम होगा, परन्तु वह पुत्र केवल 12 वर्ष तक ही जीवित रहेगा ” | यह बात सुनकर वह साहूकार ना तो ज्यादा खुश हुआ और ना ज्यादा दुखी हुआ | वह हमेशा की तरह अपनी पूजा जारी रखने लगा | कुछ दिनों बाद उसकी पत्नी गर्भवती हो गयी और उसने एक सुंदर बालक को जन्म दिया | सभी घर में बालक के जन्म पर खुशिया मना रहे थे लेकिन वह साहूकार अपना दर्द केवल खुद ही जानता था, उसने किसी को भी बालक के 12 वर्ष जीवित रहने की बात नही बताई |

सोमवार व्रत कथा /Somvar Vrat Katha

धीरे धीरे समय बीतने लगा, जब वह बालक 11 वर्ष का हुआ तो उसकी माँ ने साहूकार से उसकी शादी की बात करने को कहा लेकिन साहूकार ने शादी के लिए साफ़ मना करते हुए कहा कि वह बालक को शिक्षा के लिए काशी भेजेगा | साहूकार ने बालक के मामा को बुलाया और कुछ धन देकर बालक को काशी ले जाकर शिक्षा दिलवाने को कहा | उसने अपने पुत्र को कहा कि वह काशी जाते वक़्त यज्ञ करते और ब्राह्मणों को खाना खिलाते हुए जाए | अब दोमो मामा-भांजे ने अपनी यात्रा आरम्भ की |

रास्ते में एक बार वे दोनों जिस शहर से जा रहे थे उसका राजा अपनी पुत्री का विवाह एक ऐसे राजकुमार से करवा रहा था जिसके केवल एक आँख थी | दुल्हे का पिता बहुत चिंतित था कि अगर दुल्हन उसके पुत्र को देखेगी तो वह विवाह के लिए मना कर देगी | इसलिए उसने जब उस साहूकार के लडके को देखा तो उसने सोचा कि इस बालक को विवाह के लिए तोरण के समय मेरे पुत्र के स्थान पर दुल्हन के सामने पेश कर दूंगा तो किसी को भी मेरे पुत्र के काणे होने के विषय में पता नहीं चल सकेगा | SOMVAR VRAT KATHA/Somvar Vrat katha in hindi 2

जब दुल्हे के पिता ने उस लडके के मामा से इस विषय में बात की तो वह राजी हो गये | इस तरह उस बालक ने दुल्हे के कपड़े पहन लिए और घोडी पर बैठकर तोरण की रस्म पूरी कर दी | अब जब तोरण की रस्म पूरी हो गयी तो दुल्हे के पिता ने सोचा कि फेरो में भी उसके पुत्र के स्थान पर साहूकार के बेटे को बदल दिया जाए ताकि उसकी बात ढकी रहे | मामा फिर राजी हो गया और इस प्रकार विवाह समारोह भी निपट गया |

अब वह बालक काशी के लिए रवाना हो गया परन्तु जाने से पहले उसने दुल्हन के कपड़ो पर लिख दिया कि “तुम्हारी शादी मुझसे हुई है , लेकिन जिसके साथ तुम्हे भेजा जा रहा है वह एक आँख वाला आदमी है, और मै काशी शिक्षा ग्रहण करने जा रहा हूँ “|

जब वह बालक काशी के लिए रवाना हो गया, तब उस दुल्हन ने अपने कपड़ो पर लिखे शब्द पढ़े , और यह सब जानने का बाद उसने उस लड़के के साथ जाने से मना करते हुए कहा “यह मेरा पति नही है , मेरी शादी इससे नही हुई है , मेरा पति तो शिक्षा ग्रहण करने के लिए काशी गया है ” | अब मजबूरी में दुल्हे के पिता को सारी सच्चाई बतानी पड़ी और दुल्हन के पिता ने उसको भेजने से इंकार कर दिया | दुल्हे का परिवार वापस घर लौट आया |

कुछ दिनों के बाद वो बालक और मामा काशी पहुँच गये | वह बालक शिक्षा में लग गया और मामा ने यज्ञ करना आरम्भ कर दिया | कुछ समय के पश्चात जब वह बालक 12 वर्ष का हुआ तो एक दिन उसने अपने मामा से कहा जो यज्ञ कर रहे थे “मामा , आज मेरी तबियत ठीक नही है ” | मामा ने उसे घर के अंदर जाकर सोने को कहा | वह बालक अंदर जाकर सो गया और कुछ देर बाद उसकी मृत्यु हो गयी |SOMVAR VRAT KATHA/Somvar Vrat katha in hindi 3

कुछ देर बाद जब मामा अंदर उसे देखने आया तो उसकी म्रत्यु हो चुकी थी | मामा बहुत दुखी हुआ और सोचने लगा कि अगर मै रोऊंगा तो मेरा यज्ञ अधुरा रह जाएगा | इसलिए जब यज्ञ पूरा हुआ और ब्राहमण चले गये तो उसने रोना आरम्भ कर दिया | सयोंग से उस समय भोलेनाथ और माता पार्वती उस रास्ते से गुजर रहे थे | उन्होंने जब रोने की आवाज सूनी तो माता पार्वती जी ने कहा “नाथ , कोई आदमी रो रहा है , चलो उसके दुःख को दूर करते है ” | जब भगवान मामा के पास गये तो उन्होंने एक मृत बालक को जमीन पर पड़े हुए देखा | उसे देखकर माता पार्वती जी ने कहा “नाथ, यह तो वही साहूकार का पुत्र है जिसका आपके आश्रीवाद से जन्म हुआ था ” | यह सुनकर शिवजी ने कहा “ हे देवी, इसका जीवन इतना ही था और यह अपना जीवन बिता चुका था ” |

परन्तु माता पार्वती ने उस पर दया दिखाते हुए भगवान शिव से कहा “ हे प्रभु , आप इस बालक को जीवनदान दे दीजिये अन्यथा इसके माता-पिता शोक में मर जायेंगे ” | इस प्रकार माता पार्वती बार बार भगवान भोलेनाथ से आग्रह करने लगी, माता पार्वती के कई बार आग्रह करने पर शिवजी ने उस बालक को जीवनदान दे दिया | और कुछ समय के पश्चात वह बालक जीवित हो गया , अब मामा और भांजा दोनों अपने घर की ओर रवाना हुए | रास्ते में वो दोनों उसी शहर से गुजरे, जहाँ उस बालक का विवाह हुआ था | उन्होंने वहाँ रुक कर वहां पर भी यज्ञ किया | उस बालक के ससुर ने उसे पहचान लिया और उसे अपने महल में लेकर गया | उसने उसका भव्य स्वागत किया और एक समारोह आयोजित कर अपनी पुत्री को उसके साथ भेज दिया |

अब वो सब ख़ुशी ख़ुशी वापस अपने शहर आ गये और अपने घर की ओर चले, घर में |उस बालक के माता पिता छत पर बैठे हुए थे | माता पिता ने यह निर्णय लिया था कि “अगर उनका पुत्र जीवित वापस आ जायेगा तो वो दोनों नीचे आ जायेंगे वरना इस छत से कूदकर जान दे देंगे” | परन्तु उसी समय मामा वहां पहुँच गया और उसने बताया की “आपक पुत्र वापिस आ गया है ” | उनको विश्वास नही हुआ, तब मामा ने बताया कि उसके साथ उसकी पत्नी भी आई है | यह समाचार सुन कर वे दोनों बहुत प्रसन हुए, उस साहूकार ने अपने बेटे और बहु का स्वागत किया |

इस प्रकार भगवान शिव की कृपा से वह साहूकार अपने पुत्र के साथ ख़ुशी ख़ुशी रहने लगा |

इस तरह जो मनुष्य सोमवार का व्रत करता है और इस सोमवार व्रत कथा का श्रवण अथवा पठन करता है ,उसकी सभी मनोकामनाये पुरी होती है |

जय भोलेनाथ

सोमवार व्रत कथा

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