कार्तिक मास में तुलसी पूजन का महत्व और पूजा विधि इन हिंदी / Tulsi Puja in Kartik month in hindi

tulsi puja in kartik month in hindi

Tulsi Puja in Kartik Month in hindi

हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष में 12 मास आते है और प्रत्येक मास की अपनी एक मुख्य विशिष्टता होती है | साल के 12 महीनों में से कार्तिक का महीना सबसे उत्तम और और पवित्र माना गया है। पुराणों के अनुसार इस मास में भगवान विष्णु नारायण रूप में जल में निवास करते है। इसलिए सूर्यदय से पहले स्नान करने से पुण्य की प्राप्त होती है। इसके साथ ही कार्तिक महीने में तुलसी पूजन का महत्व और बढ़ जाता है।

कार्तिक माह में तुलसी पूजा का महात्मय पुराणों में वर्णित किया गया है. इसी के द्वारा इस बात को समझ जा सकता है कि इस माह में तुलसी पूजन पवित्रता व शुद्धता का प्रमाण बनता है. शास्त्रों में कार्तिक मास को श्रेष्ठ मास माना गया है, स्कंद पुराण में इसकी महिमा का गायन करते हुए कहा गया है :

मासानांकार्तिक: श्रेष्ठोदेवानांमधुसूदन:। तीर्थ नारायणाख्यंहि त्रितयंदुर्लभंकलौ। अर्थात मासों में कार्तिक, देवों में भगवान विष्णु और तीर्थो में बदरिकाश्रम श्रेष्ठ स्थान पाता है ।

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तुलसी आस्था एवं श्रद्धा की प्रतीक है यह औषधीय गुणों से युक्त है  तुलसी में जल अर्पित करना एवं सायंकाल तुलसी के नीचे दीप जलाना अत्यंत श्रेष्ठ माना जाता है. तुलसी में साक्षात लक्ष्मी का निवास माना गया है  अत: कार्तिक मास में तुलसी के समीप दीपक जलाने से व्यक्ति को लक्ष्मी की प्राप्ती होती है ।

तुलसी पूजन महत्व | Importance of Tulsi Worship /Tulsi Puja in Kartik Month

कार्तिक मास के समान कोई भी माह नहीं है पुराणों में वर्णित है कि यह माह धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष को देने वाला है और इस समय पर तुलसी पूजा विशेष फलदायी होती है. कार्तिक मास में तुलसी पूजा करने से पाप नष्ट होते हैं. मान्यता है कि इस मास में जो व्यक्ति  तुलसी के समक्ष दीपक जलाता है उसे सर्व सुख प्राप्त होते हैं. इस मास में भगवान विष्णु एवं तुलसी के निकट दीपक जलाने से अमिट फल प्राप्त होते हैं. इस मास में की गई भगवान विष्णु एवं तुलसी उपासना असीमित फलदायीहोती है ।

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तुलसी के पौधे में चमत्कारिक गुण मौजूद होते हैं. प्रत्येक आध्यात्मिक कार्य में तुलसी की उपस्थिति बनी रहती है. सारे माहों में कार्तिक माह में तुलसी पूजन विशेष रुप से शुभ माना गया है. वैष्णव विधि-विधानों में तुलसी विवाह तथा तुलसी पूजन एक मुख्य त्यौहार माना गया है. कार्तिक माह में सुबह स्नान आदि से निवृत होकर तांबे के बर्तन में जल भरकर तुलसी के पौधे को जल दिया जाता है. संध्या समय में तुलसी के चरणों में दीपक जलाया जाता है. कार्तिक के पूरे माह यह क्रम चलता है. इस माह की पूर्णिमा तिथि को दीपदान की पूर्णाहुति होती है ।

कार्तिक मास में तुलसी पूजा विधि /Tulsi Puja in Kartik Month

  • तुलसी के पौधे के चारों तरफ स्तंभ बनाकर उस पर तोरण सजायें।
  • रंगोली से अष्टदल कमल बनायें। साथ ही शंख,चक्र और गाय के पैर बनायें।
  • तुलसी के साथ आंवले का गमला लगायें। तुलसी का पंचोपचार सर्वांग पूजा करें। 
  • दशाक्षरी मंत्र से तुलसी का आवाह्न करें। ये मंत्र है : श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वृन्दावन्यै स्वाहा।
  • घी का दीप और धूप दिखाने के साथ ही सिंदूर,रोली,चंदन और नैवेद्य चढ़ायें।
  • तुलसी जी को वस्‍त्र चढ़ाने के बाद फिर लक्ष्मी अष्टोत्र या दामोदर अष्टोत्र पढ़ें।
  • तुलसी के चारों ओर दीपदान करें।

क्‍यों होती है कार्तिक में तुलसी की पूजा / /Tulsi Puja in Kartik Month

कार्तिक माह की अमावस्‍या को तुलसी जी की जन्‍म तिथ‍ि माना गया है। पद्मपुराण में तुलसी के जन्‍म की एक कथा इस प्रकार बताई गई है- तुलसी पूर्व जन्‍म में वृंदा थीं और जालंधर राक्षस की पत्‍नी थीं। उसके अत्‍याचारों की वजह से भगवान विष्‍णु ने जालंधर का वध क‍िया था। इससे दुखी वृंदा को भगवान विष्‍णु ने वरदान दिया था कि वह उनकी प्रिया बनेंगी। अपने सतीत्‍व और पतिव्रता धर्म के कारण ही तुलसी विष्‍णुप्र‍िया बनती हैं और श्रीहरि की पूजा में उनको विशेष स्‍थान द‍िया जाता है। 

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ऐसा माना जाता है कि जहां श्रीकृष्‍ण ने लीला रची थी, उस जगह का नाम तुलसी के वृंदा रूप के कारण ही वृंदावन कहलाता है। यहां कभी तुलसी के वन हुआ करते थे। वैसे आज भी यहां तुलसी के पौधे खूब देखे जा सकते हैं। 

जय तुलसी माता जय तुलसी माता जय तुलसी माता जय तुलसी माता जय तुलसी माता जय तुलसी माता

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धन्यवाद,
ज्योति गोयनका

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